सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने की उम्मीद जताई है। अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है। आइए जानते हैं सुनवाई में क्या दलीलें दी गईं…

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मौखिक रूप से कहा कि लोकसभा अध्यक्ष से तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से 20 बागी टीएमसी सांसदों को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की उम्मीद है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बनर्जी की ओर से दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष से इन याचिकाओं पर समयबद्ध फैसला लेने की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय पेश हुए। उन्होंने कहा कि अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बागी सांसदों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन उन्होंने शुरुआती 14 दिन की अवधि में अपने जवाब दाखिल नहीं किए। उन्होंने बताया कि इसके बाद अध्यक्ष ने जवाब दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 22 सितंबर कर दी थी। इसके बावजूद सांसदों ने फिर समय बढ़ाने की मांग की है।
टीएमसी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलील?
टीएमसी सांसद के अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने दसवीं अनुसूची के तहत चल रही कार्यवाही के संदर्भ में स्थिति को “हास्यास्पद” बताया। उन्होंने कहा, “अगर किसी को अयोग्य ठहरा दिया जाता है, तो वह उसी तारीख से सांसद के रूप में काम नहीं कर सकता।” उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकसभा अध्यक्ष दसवीं अनुसूची से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों का पालन कर रहे हैं।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष इन अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। इस पर पीठ ने कहा कि समयबद्ध फैसला होने की उम्मीद है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम उम्मीद करेंगे कि जिस मामले में भी जल्द फैसला जरूरी है, उसे शीघ्र तय किया जाए। मामले की प्रकृति ही ऐसी है कि इसमें जल्द निर्णय की जरूरत है।”

टीएमसी के बागी सांसदों की अयोग्यता का मामला: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- लोकसभा अध्यक्ष से जल्द फैसले की उम्मीद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीPublished by: देवेश त्रिपाठी Updated Wed, 23 Sep 2026 05:50 PM IST
सार
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सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी के 20 बागी सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर लोकसभा अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने की उम्मीद जताई है। अभिषेक बनर्जी ने इन सांसदों के खिलाफ संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की मांग की है। आइए जानते हैं सुनवाई में क्या दलीलें दी गईं…

सुप्रीम कोर्ट – फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मौखिक रूप से कहा कि लोकसभा अध्यक्ष से तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी की ओर से 20 बागी टीएमसी सांसदों को संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की उम्मीद है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ बनर्जी की ओर से दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लोकसभा अध्यक्ष से इन याचिकाओं पर समयबद्ध फैसला लेने की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय पेश हुए। उन्होंने कहा कि अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ने बागी सांसदों को नोटिस जारी किए थे, लेकिन उन्होंने शुरुआती 14 दिन की अवधि में अपने जवाब दाखिल नहीं किए। उन्होंने बताया कि इसके बाद अध्यक्ष ने जवाब दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 22 सितंबर कर दी थी। इसके बावजूद सांसदों ने फिर समय बढ़ाने की मांग की है।
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टीएमसी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में दी क्या दलील?
टीएमसी सांसद के अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय ने दसवीं अनुसूची के तहत चल रही कार्यवाही के संदर्भ में स्थिति को “हास्यास्पद” बताया। उन्होंने कहा, “अगर किसी को अयोग्य ठहरा दिया जाता है, तो वह उसी तारीख से सांसद के रूप में काम नहीं कर सकता।” उन्होंने सवाल किया कि क्या लोकसभा अध्यक्ष दसवीं अनुसूची से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से की गई टिप्पणियों का पालन कर रहे हैं।विज्ञापन
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि लोकसभा अध्यक्ष इन अयोग्यता याचिकाओं पर पहले ही नोटिस जारी कर चुके हैं। इस पर पीठ ने कहा कि समयबद्ध फैसला होने की उम्मीद है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हम उम्मीद करेंगे कि जिस मामले में भी जल्द फैसला जरूरी है, उसे शीघ्र तय किया जाए। मामले की प्रकृति ही ऐसी है कि इसमें जल्द निर्णय की जरूरत है।”
मामले का जल्द हो समाधान : सुप्रीम कोर्ट
न्यायमूर्ति बागची ने कहा, “हम केवल संबंधित प्राधिकारी को यह याद दिला रहे हैं कि दसवीं अनुसूची के महत्व को ध्यान में रखते हुए मामले का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए। हम अनिवार्य निर्देश नहीं देना चाहते, लेकिन केशम मेघचंद्र सिंह मामले में दिए गए फैसले को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे का जल्द समाधान किया जाना चाहिए।”
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष सांविधानिक दायित्व निभा रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में अदालत को कोई समयसीमा तय नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “कृपया इसे दूसरे तरीके से न लें, लेकिन क्या किसी सांविधानिक प्राधिकारी को ‘याद दिलाने’ की जरूरत है?”